उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रतापगढ़ एक अहम जिला माना जाता है, जहां राजनीतिक समीकरण अक्सर चर्चा में रहते हैं। ऐसे में समाजवादी पार्टी के विधायक डॉ. आर.के. वर्मा ने अपने राजनीतिक सफर, विचारधारा और वर्तमान मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी।
राजनीति में आने की शुरुआत
डॉ. आर.के. वर्मा ने बताया कि उनकी राजनीति में रुचि की शुरुआत इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान ही हो गई थी। हालांकि, उन्होंने पहले अपने करियर को प्राथमिकता दी और अस्पताल व व्यवसाय स्थापित करने के बाद सक्रिय राजनीति में कदम रखा।
साल 2009 से लगातार जनता के बीच काम करते हुए उन्होंने मजबूत जनाधार बनाया और आज वे तीन बार विधायक चुने जा चुके हैं।
अपना दल छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल होने का कारण
डॉ. वर्मा पहले अपना दल से जुड़े हुए थे, लेकिन बाद में उन्होंने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी विचारधारा में कोई बदलाव नहीं आया है।
उनके अनुसार, अपना दल अपने मूल मुद्दों से भटक गया था और पिछड़े वर्ग, गरीबों तथा आम कार्यकर्ताओं की समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठाने में कमजोर पड़ गया था।
69,000 शिक्षक भर्ती विवाद पर सवाल
उत्तर प्रदेश की चर्चित 69,000 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी उन्होंने गंभीर आरोप लगाए। डॉ. वर्मा का कहना है कि इस भर्ती में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ और हजारों पिछड़े व अनुसूचित वर्ग के अभ्यर्थियों को उनकी योग्यता के बावजूद अवसर नहीं मिला।
रानीगंज से जीत का अनुभव
2022 विधानसभा चुनाव में उन्हें रानीगंज सीट से उम्मीदवार बनाया गया था। उन्होंने बताया कि उस क्षेत्र में जातीय समीकरण उनके पक्ष में नहीं थे, इसके बावजूद जनता ने उनके काम और व्यक्तित्व पर भरोसा जताया।
उनका मानना है कि चुनाव में जाति से अधिक महत्वपूर्ण जनता का विश्वास और नेता की कार्यशैली होती है।
राजा भैया और प्रमोद तिवारी पर प्रतिक्रिया
प्रतापगढ़ की राजनीति में अक्सर राजा भैया के समर्थन की चर्चा होती है। इस पर डॉ. वर्मा ने कहा कि सभी नेता अपने-अपने सिद्धांतों के अनुसार राजनीति करते हैं और किसी प्रकार का गठजोड़ नहीं है।
प्रमोद तिवारी के साथ संबंधों पर उन्होंने कहा कि उनके किसी से व्यक्तिगत मतभेद नहीं हैं, लेकिन गलत नीतियों या कार्यों का वे समर्थन नहीं करते।
रानीगंज में प्रमुख विकास कार्य
अपने कार्यकाल के दौरान किए गए विकास कार्यों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि:
- फतनपुर–बीरापुर संपर्क मार्ग का चौड़ीकरण
- प्रशासनिक मनमानी पर नियंत्रण
- स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार कम करने के प्रयास
इन पहलों से क्षेत्र में कानून व्यवस्था और विकास में सुधार हुआ है।
वायरल वीडियो और भ्रष्टाचार का मुद्दा
कुछ समय पहले एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उनके छूते ही एक दीवार गिर गई थी। इस पर उन्होंने कहा कि यह घटना घटिया निर्माण और भ्रष्टाचार का उदाहरण थी।
उनका आरोप है कि यह निर्माण कार्य सत्ता से जुड़े लोगों की कंपनी द्वारा कराया गया था और उन्होंने इसे उजागर करने का काम किया।
युवाओं के लिए संदेश
डॉ. वर्मा का मानना है कि युवाओं को राजनीति में आने से पहले अपने जीवन में आर्थिक और पेशेवर स्थिरता बनानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि केवल सोशल मीडिया की लोकप्रियता के भरोसे राजनीति करना सही नहीं है। पहले अपने करियर को स्थापित करना और समाज के लिए काम करना आवश्यक है।
योगी सरकार के कामकाज पर उठाए सवाल
उत्तर प्रदेश सरकार के कामकाज पर भी उन्होंने सवाल उठाए। उनका कहना है कि:
- नए मेडिकल कॉलेज के नाम पर पुराने अस्पतालों का नाम बदला जा रहा है
- प्रदेश में बड़े उद्योग स्थापित नहीं हो पाए हैं
- युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाना पड़ रहा है
निष्कर्ष
डॉ. आर.के. वर्मा का यह बयान न केवल उनके राजनीतिक अनुभव को दर्शाता है, बल्कि प्रतापगढ़ और उत्तर प्रदेश की राजनीति के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को भी उजागर करता है। उन्होंने अपनी बातों के माध्यम से विकास, पारदर्शिता और जनहित को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।

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